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पिछले 72 घंटों में 3 लोग कह चुके हैं की मैं selfish और self-centered हूँ. इतने सारे लोग गलत तो नहीं हो सकते! कुछ तो कहीं गड़बड़ है, पर क्या ? मुझे लग रहा है की मैं लोगो की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतर पर रहा हूँ. किसी को लगता है की मेरे पास समय नहीं है, किसी को लगता है की मेरे को दूसरों से फर्क नहीं पड़ता और किसी को लगता है की मैं पत्थर ह्रदय हूँ जो की दूसरों की परेशानियों से तनिक भी विचलित नहीं होता. मेरे समझ नहीं आ रहा है की मैं सहसा इतना बुरा कैसे हो गया.
मुझे अपने लिए समय चाहिए, अपने बारे में सोचने का वक़्त चाहिए. सबको लगता है की मैं अपने बारे में ही सोचता हूँ लेकिन वास्तविकता ये है की मुझे खुद अपनी खबर नहीं. सुबह से शाम केवल धक्का-मुक्की में बीत जाती है, जीवन अपने वृहद् रूप में मैं जी ही नहीं पाता. ले दे के 3 -4 घंटे मेरे पास अपने लिए होते हैं, मैं नहीं करना चाहता किसी से बात उसमे. मैं नहीं रहना चाहता फोन पे, नेट पे , सड़क पे. मुझे अकेला रहना है. क्या अपने लिए कुछ समय निकालना मुझे selfish बना देता है?
जीवन कहाँ जा रहा है? में क्यूँ विदेश जा रहा हूँ? मैं क्यूँ ये नौकरी कर रहा हूँ? मेरे सपने कहाँ खो गए हैं? मेरे पास केवल सवाल हैं. और शायद थोडा अवसाद है.
या शायद मुझे एक psychiatrist की ज़रुरत है, इससे पहले की मेरा रोग और बढ़ जाये.
2 comments:
aisa sab sochte hain. main bhi. so its ok. but sometimes one has to take time out for others. Even if we have to compromise on the limited time that we have for ourselves. Thats because other's happiness do matter to us right. So once in a while, get some time out and call people. and baaki time masti kar. bole to zaada analyse nahi karne ka.
PS: i want to go to Indiaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa................
I appreciate your views.
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